Thursday, August 31, 2017

A short guide for upcoming exams-2017.

This article is for Youth who are preparing for competitive examinations.

IBPS (Institute of Banking Personnel Selection)
IBPS ने 20 राष्ट्रीय बैंकों में P.O और मैनेजर ट्रेनिं के लिए पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है।
3562 पदों के लिए अभ्यर्थी 5 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं। सामान्य व ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क Rs.600 तथा एससी-एसटी विकलांग अभ्यर्थियों के लिए 100 रुपए आवेदन शुल्क रहेगा। अभ्यर्थी की आयु सीमा 20 से 30 साल के बीच होनी जरूरी है। वही SC ST अभ्यर्थियों को ऊपरी आयु सीमा में 5 साल की छूट तथा ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को 3 वर्ष की छूट, निशक्त जनों को 10 वर्ष की छूट तथा भूतपूर्व अभ्यर्थियों को 5 साल की छूट है। सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री होना जरूरी है। आवेदन IBPS.in पर जाकर कर सकते हैं। इसके लिए व्यक्ति के पास ईमेल ID पता मोबाइल नंबर होना जरूरी है। अभ्यर्थी को सबसे पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा इसके बाद मांगी गई जानकारी भरकर आवेदन को सबमिट कर के आवेदन शुल्क जमा कराना होगा।

प्रक्रिया:-
न्यूनतम कट ऑफ पास करने पर ही मुख्य परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। मुख्य परीक्षा 26 नवंबर को संभावित।
बैंक पीओ व मैनेजर ट्रेनिं बनने के लिए अभ्यर्थी को तीन चरणों से गुजरना होगा। इसमें सर्वप्रथम प्रारंभिक परीक्षा होगी इसमें अलग-अलग विषयों की न्यूनतम कट ऑफ पास करने वाले व्यक्तियों को मुख्य परीक्षा में बैठने का मौका मिलेगा। मुख्य परीक्षा में भी अलग-अलग विषयों की न्यूनतम कट ऑफ, फाइनल कट ऑफ पार करने वाले अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में शामिल किया जाएगा। फाइनल चयन मुख्य परीक्षा तथा इंटरव्यू के अंकों को जोड़कर किया जाएगा प्रारंभिक परीक्षा व मुख्य परीक्षा ऑनलाइन होगी।

प्रारंभिक परीक्षा:-
प्रारंभिक परीक्षा में तीन विषयों गणित अभियोग्यता, रीजनिंग तथा अंग्रेजी भाषा से 100 प्रश्न पूछे जाएंगे। इसमें अंग्रेजी भाषा विषय से 30 सवाल, गणित तथा रीजनिंग विषय से 35 - 35 सवाल पूछे जाएंगे। प्रश्न पत्र को हल करने के लिए 1 घंटे का समय दिया जाएगा। इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए प्रत्येक विषय में अलग-अलग न्यूनतम कट ऑफ को पास करना होगा। मुख्य परीक्षा भी ऑनलाइन होगी जो 26 नवंबर को संभावित है। प्रारंभिक परीक्षा 7,8,14 व 15 अक्टूबर को होगी। इस परीक्षा का रिजल्ट 20 अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में घोषित किया जाएगा। मुख्य परीक्षा का रिजल्ट दिसंबर महीने में घोषित होगा। इंटरव्यू जनवरी और फरवरी महीने में आयोजित होने की संभावना है।

मुख्य परीक्षा :-
मुख्य परीक्षा में चार विषयों से कुल 200 अंकों के 155 सवाल पूछे जाएंगे। इसमें रीजनिंग व कंप्यूटर विषय से 45 सवाल 60 अंको के पूछे जाएंगे। वहीं सामान्य ज्ञान और बैंकिंग ज्ञान के 40 सवाल 40 अंकों के पूछे जाएंगे। अंग्रेजी भाषा से कुल 35 सवाल 40 अंकों के तथा डाटा एनालिसिस वह इंटरप्रिटेशन से 60 अंकों के 35 सवाल पूछे जाएंगे। रीजनिंग व कंप्यूटर विषय के सवालों को हल करने के लिए 60 मिनट, अर्थव्यवस्था तथा बैंकिंग ज्ञान के लिए 35 मिनट, अंग्रेजी भाषा के लिए 40 मिनट तथा डीआई के लिए 45 मिनट मिलेंगे। इस मुख्य परीक्षा के सवालों को हल करने का कुल समय 3 घंटे का रहेगा इसके साथ-साथ दो सवाल अंग्रेजी भाषा के होंगे जिसको हल करने के लिए 30 मिनट का समय दिया जाएगा।

इंटरव्यू :-
इंटरव्यू कुल 100 अंको का होगा। इसमें न्यूनतम 40 फ़ीसदी अंक लाने अनिवार्य होंगे। वही SC ST OBC व निःशक्त अभ्यर्थियों को 5% की छूट रहेगी। इंटरव्यू के समय अभ्यर्थियों को सभी शैक्षणिक दस्तावेज, जाति प्रमाण पत्र, आदि ओरिजिनल लेकर जाने होंगे।

तैयारी:-
 विशेषज्ञों के अनुसार परीक्षा में सफलता के लिए रीजनिंग व सामान्य ज्ञान पर ज्यादा फोकस करें।
एक्सपर्ट के अनुसार इस परीक्षा में सफलता के लिए रीजनिंग व सामान्य ज्ञान पर ज्यादा ध्यान देना होगा। वही गणित भी महत्वपूर्ण विषय है। इसमें व्यक्ति कितना स्कोर करेगा उसकी गणना करने की गति पर निर्भर करता है। इस विषय में अच्छा स्कोर करने के लिए जोड़, बाकी, गुणा, भाग जीतनी अच्छी स्पीड से करेंगे उतना ही कॉन्फिडेंस भी बढेगा।

रीजनिंग :-
प्रिलिम्स परीक्षा में वर्णमाला, श्रंखला व चिन्हों से संबंधित कूटलेखन, दिशा, दूरी, रक्त संबंध, क्रम परीक्षण, बैठक व्यवस्था, समय निर्धारित, न्याय वाक्य, आंकड़े पर्याप्तता, मैनेजमेंट रीजनिंग आदि पर ध्यान देना जरूरी है। इसके बाद वे सवाल करने हैं, जो कम समय व जल्दी हल हो सके। मुख्य परीक्षा में प्रिलिम्स व कथन संबंधित संपूर्ण अध्ययन की जानकारी जरूरी है। इसमें कथन निष्कर्ष, कथन व तर्क और पूर्व अवधारणाएं, मैनेजमेंट रीजनिंग, तथा गद्दांशों की जानकारी जरूरी है।

सामान्य ज्ञान :-
अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए रोज अखबार से अप टू डेट रहना होगा। प्रतिदिन राजनीतिक तथा विधि विभाग व आर्थिक घटनाओं की जानकारी होना जरुरी है। बैंकिंग क्षेत्र की सभी योजनाओं रेपो रेट, बैंक दर, डिजिटल इंडिया व केंद्र सरकार की योजनाओं से सवाल आते हैं।

अंग्रेजी भाषा :-
अंग्रेजी भाषा में ग्रामर, वोकेब, कोम्प्रेहेंसिव व राइटिंग सेक्शन के होंगे। इस परीक्षा में व्याकरण से सपोर्टिंग एरर, क्लोज टेस्ट, रिक्त स्थान पूर्ति के सवाल पूछे जाते हैं।
वोकेब एंटोनिम, सिनोनिम, इडियम व फ्रेजेज आदि से सवाल होंगे। कोम्प्रेहेंसिव पार्ट से क्लोज टेस्ट तथा पैसेज से सवाल होते है। इसमें ग्रामर, वोकेब,रेडिंग व राइटिंग चारों विभागों का ज्ञान जरूरी है। वोकेब के लिए न्यूज़पेपर मैगजीन,नोवेल्स की स्टडी करें तथा वोकेब को रटे नहीं उसका वाक्य में प्रयोग करें।

कंप्यूटर:-
कंप्यूटर के बारे में आधारभूत जानकारी होनी जरूरी है। इस में कंप्यूटर का इतिहास भाषा, एम एस ऑफिस, शार्ट की, इंटरनेट व नेटवर्किंग, वायरस की जानकारी होना जरूरी है। इसमें पूछे जाने वाले सवाल आसान तथा भाषा कठिन होती है।

सिविल सर्विसेज एग्जाम तैयारी के लिए इन बातों का ध्यान जरूर रखें
यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जाम 2017 की तारीख नजदीक आ रही है। परीक्षार्थियों के पास तैयारी के लिए अब बस कुछ ही वक्त बचा है। ऐसे में जरूरी है, कि आप इस आख़िरी वक़्त का उपयोग रिवीजन के लिए करें। परीक्षार्थी आमतौर पर निम्न गलतियां करते हैं, जो उनकी सफलता के बीच पहाड़ बनकर खड़ी हो जाती है।

  1. अगर आप यह सोचते हैं, कि एग्जाम के लिए अनलिमिटेड पढ़ाई करनी होती है और वह सी एस सी सिलेबस से ज्यादा तैयारी में लग जाते हैं। जिसकी वजह से उनका समय भी नष्ट होता है, और तैयारी भी पूरी नहीं हो पाती। 
  2. बीते साल के क्वेश्चन पेपर को न देखना भी एक बड़ी गलती है। पिछले साल व पिछले कुछ वर्षों के पेपर से परीक्षा के पैटर्न और सवालों का अंदाजा लगाया जा सकता है। 
  3. एनसीईआरटी किताबों को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी गलतियों में से एक है। अगर आप तैयारी के लिए एनसीईआरटी की किताबें नहीं पढ़ते तो आप यह मान कर चले कि आप आईएएस की परीक्षा में सफल नहीं होंगे। 


  • इन परीक्षाओं की तैयारी के लिए कुछ महत्वपूर्ण सवाल और उनके उत्तर


  1. भारत का पहला पेपर लेस एवं ब्रांच रहित बैंक कौन सा है ? उत्तर-डिजि बैंक
  2. पॉकेट एक डिजिटल वॉलेट है, इसे किसने जारी किया है ? उत्तर-आईसीआईसीआई बैंक
  3. निम्न में से कौन डिजिटल बैंकिंग का सबसे सुगम साधन है? उत्तर-डिजिटल वॉलेट
  4. भारत के किस राज्य में आलू का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है? उत्तर-यूपी
  5. ग्लोबल इकोनॉमिक प्रोस्पेक्टस नामक रिपोर्ट किसके द्वारा प्रकाशित की जाती है? उत्तर-विश्व बैंक
  6. निम्न में से किसने आधार नंबर को केवाईसी के अंतर्गत एकमात्र साक्ष्य माने जाने की सिफारिश की है?उत्तर-विट्ठल कमेटी
  7. प्रायद्वीपीय भारत में सबसे लंबी नदी कौन सी है? उत्तर-गोदावरी
  8. पहला सार्क सम्मेलन किस साल आयोजित किया गया था ? उत्तर-1985
  9. सेवा के अधिकार की अवधारणा की शुरुआत किस देश से हुई? उत्तर-ग्रेट ब्रिटेन
  10. राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना की शुरुआत भारत में किस साल हुई? उत्तर-1999-2000
आशा है इस लेख से आप को मदद मिलेगी। 

Friday, August 25, 2017

Gurmeet Ram Rahim Singh's Rape Verdict. राम रहीम पर लगे आरोपों की पूरी लिस्ट



Gurmit Ram Rahim

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह आज शुक्रवार को दोषी करार दिये गए हैं।

रेप केस में पंचकूला की सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें दोषी पाया है। अब उनको 28 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी। फिलहाल उन्हें कोर्ट से सीधे अम्बाला जेल ले जाया गया है। उधर हरियाण सरकार की ओर से फैसले के बाद हर स्थित से निपटने के लिए सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर ली गयी है।
राम रहीम पर लगे आरोपों की पूरी लिस्ट

गुरमीत राम रहीम, एक नाम, जिसका इतिहास किसी रहस्य से कम नहीं है। उन्हें एक संत के रूप में देखा जाता रहा है। समाजसेवा से लेकर फिल्मों में सुपर हीरो तक, वो सभी जगह नजर आ चुके हैं। यही वजह है कि वो अपने सत्संग से कम, अपनी लाइफ स्टाइल को लेकर ज्यादा सुर्खियों में रहे हैं। इन सब के बीच उनका विवादों से भी गहरा रिश्ता रहा है।

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम पर एक साध्वी के साथ रेप का अारोप लगा। ये अारोप 2002 को एक गुमनाम लैटर के जरिए लगाया गया। तब उच्च न्यायालय ने लेटर का संज्ञान लेते हुए सितम्बर 2002 को मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई ने जांच में आरोप सही पाए और डेरा प्रमुख के खिलाफ विशेष अदालत के सामने 31 जुलाई, 2007 में आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले में डेरा प्रमुख को जमानत तो मिल गई, लेकिन यह मामला लंबे समय से पंचकुला की सीबीअाई अदालत में चल रहा है।

यहीं नहीं बाबा राम रहीम पर और भी बहुत से संगीन अारोप हैं। माना जाता है कि गुरमीत सिंह राम रहीम का गुरजंत सिंह जोकि खालिस्तान लिबरेशन फोर्स का सदस्य है, उससे करीब का संबंध है।

पत्रकार छत्रपति ने साध्वी बलात्कार मामले को उजागर किया था।
पत्रकार छत्रपति 

राम रहीम पर एक पत्रकार और एक अन्य की हत्या का भी अारोप है। आरोप है कि छत्रपति ने साध्वी बलात्कार मामले को अपने अखबार में छापा तो नवंबर 2002 में उसकी गोली मार कर हत्या कर दी गई। ये मामला अभी फाइनल स्टेज में है। ये मामला उसी कोर्ट में है, जिसमे बाबा राम रहीम पर फैसला आना है।

राम रहीम पर ये भी आरोप है कि उन्होंने डेरे के पूर्व प्रबंधक रंजीत सिंह की भी हत्या करवाई, क्योंकि वो डेरे के कई राज जान चुका था। रंजीत सिंह की 10 जुलाई 2003 को हत्या कर दी गई थी, और तब इन दोनों हत्याओं में डेरा सच्चा सौदा का नाम सामने आया था।

बाबा पर 400 साधुओं को नपुंसक बनाने का मामला भी दर्ज है। डेरा में यह कहकर साधुओं को नपुंसक बनाया गया था कि नपुंसक बनाए जाने से वे लोग डेरा प्रमुख के जरिए प्रभु को महसूस कर सकेंगे।

यही नहीं डेरा सच्चा सौदा का साम्राज्य विदेशों तक फैला हुआ है। देश में डेरा के करीब कई आश्रम हैं और उसकी शाखाएं अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड से लेकर ऑस्ट्रेलिया और यूएई तक फैली हुई हैं।

डेरा प्रमुख पर ये भी आरोप है, कि वो अपने आश्रम में निजी सेना को प्रशिक्षण भी देते रहते हैं। बाबा जब बाहर निकलते हैं, तो उनके साथ कई अंगरक्षक भी दिखाई देते हैं।

आरोप ये भी है, कि 700 एकड़ के सिरसा वाले आश्रम में एक छोटी-मोटी सेना को भी तैयार किया गया है। डेरे के समर्थक एेसे किसी अारोप को नहीं मानते और अपने गुरू की पेशी पर भड़के हुए हैं। समर्थकों का कहना है कि फैसला चाहे जो भी हो वह राम रहीम को अांच तक नहीं अाने देंगे।

इसलिए ही सुरक्षा को देखते हुए हरियाणा और पंजाब के चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात है। दोनों प्रदेशों में हाई अलर्ट भी जारी कर दिया गया है।

Role of women in female feticide (embryoctony) in India.

Pregnant


क्या है कन्या भ्रूण हत्या और क्यों ?
कन्या भ्रूण हत्या जन्म से पहले लड़कियों को मारने की सामाजिक कुप्रथा है। इस परंपरा का वाहक केवल अशिक्षित और निम्न मध्यम वर्ग ही नहीं बल्कि एक उच्च शिक्षित समाज भी है। भारत में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात जैसे सबसे समृद्ध राज्यों में लिंग अनुपात सबसे कम है। गर्भ से लिंग परीक्षण जाँच के बाद बालिका शिशु को हटाना कन्या भ्रूण हत्या है। केवल पहले लड़का पाने की परिवार में बुजुर्ग सदस्यों की इच्छाओं को पूरा करने के लिये जन्म से पहले बालिका शिशु को गर्भ में ही मार दिया जाता है।

ये सभी प्रक्रिया पारिवारिक दबाव खासतौर से पति और ससुराल पक्ष के लोगों के द्वारा की जाती है। गर्भपात कराने के पीछे सामान्य कारण अनियोजित गर्भ है। जबकि कन्या भ्रूण हत्या परिवार द्वारा की जाती है। भारतीय समाज में अनचाहे रुप से पैदा हुई लड़कियों को मारने की प्रथा सदियों से है।

भारत में 1979 में अल्ट्रासाउंड तकनीक आयी हालांकि इसका फैलाव बहुत धीमे था। लेकिन वर्ष 2000 में व्यापक रुप से फैलने लगा। इसका आंकलन किया गया कि 1990 से, लड़की होने की वजह से 10 मिलीयन से ज्यादा कन्या भ्रूणों का गर्भपात हो चुका है। हम देख सकते हैं कि इतिहास और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के द्वारा कन्या भ्रूण हत्या किया जा रहा है। लोगों का मानना हैं, कि बालक शिशु अधिक श्रेष्ठ होता है। क्योंकि वो भविष्य में परिवार के वंश को आगे बढ़ाने के साथ ही हस्तचालित श्रम भी उपलब्ध करायेगा। पुत्र को परिवार की संपत्ति के रुप में देखा जाता है जबकि पुत्री को जिम्मेदारी के रुप में माना जाता है।

प्रचीन समय से ही भारतीय समाज में लड़कियों को लड़कों से कम सम्मान और महत्व दिया जाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, खेल आदि क्षेत्रों में लड़कों की तरह इनकी पहुँच नहीं होती है। लिंग चयनात्मक गर्भपात से लड़ने के लिये, लोगों के बीच में अत्यधिक जागरुकता की जरुरत है। “बेटियाँ अनमोल होती हैं” के अपने पहले ही भाग के द्वारा आम लोगों के बीच जागरुकता बढ़ाने के लिये टी.वी पर आमिर खान के द्वारा चलाये गये एक प्रसिद्ध कार्यक्रम ‘सत्यमेव जयते’ ने कमाल का काम किया है। जागरुकता कार्यक्रम के माध्यम से बताने के लिये इस मुद्दे पर सांस्कृतिक हस्तक्षेप की जरुरत है। लड़कियों के अधिकार के संदर्भ में हाल के जागरुकता कार्यक्रम जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं या बालिका सुरक्षा अभियान आदि बनाये गये हैं।

लोगों का मानना है कि लड़के परिवार के वंश को जारी रखते हैं जबकि वो ये बेहद आसान सी बात नहीं समझते कि दुनिया में लड़कियाँ ही शिशु को जन्म दे सकती हैं, लड़के नहीं। आज शिक्षित वर्ग के पुरुषों द्वारा इसका कहीं कहीं परिवार में विरोध देखने को मिल रहा है। इसके सकरात्मक परिणाम सामने आ रहे है।

आज भी महिलाओं की भूमिका मुख्य है। इस कुप्रथा-अभिशाप में सबसे पहले परिवार की महिलाये भागीदार है। चाहे वे शिक्षित हो या अनपढ़। मां, ननद, भाभी, चाची, ताई, मौसी, भुआ, बहन आदि की भूमिका इस पाप को करने में अग्रणी है। जब किसी महिला के पहले जन्म पर कन्या जन्म ले लेती है, तो इन सब की अपेक्षाएं दूसरे जन्म के समय शिशु बालक के रूप में बढ़ जाती है। फलस्वरूप जन्म देने वाली महिला पर अत्यधिक मानसिक दबाव आ जाता है। जिसके चलते वह अपने आप को इन रिस्तेदारों के हवाले कर देती है। यहाँ से शुरू होता है भ्रूण लिंग जाँच से भ्रूण हत्या तक का सफर। अगर गर्भ में कन्या भ्रूण हुवा तो गर्भपात करके कन्या भ्रूण हत्या कर दी जाती है।    
Female Child 
 
एक नजर 2011 की जनगणना के अनुसार।
2011 की जनगणना के अनुसार इन दस राज्यों में सबसे कम लिंगानुपात है।

S.No.           State                      Sex Ratio      Child Sex Ratio 
1.                 हरियाणा                 879                   834              
2.                 पंजाब                     895                    846
3.                 जम्मू और कश्मीर   889                    862
4.                 दिल्ली                    868                    871
5.                 चंडीगढ़                   818                    880
6.                 राजस्थान               928                    888
7.                 गुजरात                   919                    890
8.                 उत्तराखंड               963                    890
9.                 महाराष्ट्र                 929                    894
10.               उत्तर प्रदेश             912                    902

रोकने के उपाय 

कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम के उपाय
सरकार ने देश में कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई है। इसमें जागरुकता पैदा करने और विधायी उपाय करने के साथ-साथ महिलाओं को सामाजिक-आर्थिक रूप से अधिकार संपन्न बनाने के कार्यक्रम शामिल हैं। इनमें से कुछ उपाय नीचे दिए गए हैः

1. गर्भ धारण करने से पहले और बाद में लिंग चयन रोकने और प्रसवपूर्व निदान तकनीक को नियमित करने के लिए सरकार ने एक व्यापक कानून, गर्भधारण से पूर्व और प्रसवपूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन पर रोक) कानून 1994 में लागू किया। इसमें 2003 में संशोधन किया गया।

2. सरकार इस कानून को प्रभावकारी तरीके से लागू करने में तेजी लाई और उसने विभिन्न नियमों में संशोधन किए जिसमें गैर पंजीकृत मशीनों को सील करने और उन्हें जब्त करने तथा गैर-पंजीकृत क्लीनिकों को दंडित करने के प्रावधान शामिल है। पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड उपकरण के इस्तेमाल का नियमन केवल पंजीकृत परिसर के भीतर अधिसूचित किया गया। कोई भी मेडिकल प्रैक्टिशनर एक जिले के भीतर अधिकतम दो अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर ही अल्ट्रा सोनोग्राफी कर सकता है। पंजीकरण शुल्क बढ़ाया गया।

3. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ने सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे अधिनियम को मजबूती से कार्यान्वित करें और गैर-कानूनी तरीके से लिंग का पता लगाने के तरीके रोकने के लिए कदम उठाएं।

4. माननीय प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया कि वे लिंग अनुपात की प्रवृति को उलट दें और शिक्षा और अधिकारिता पर जोर देकर बालिकाओं की अनदेखी की प्रवृत्ति पर रोक लगाएं।

5. स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों से कहा है कि वे इस कानून को गंभीरता से लागू करने पर अधिकतम ध्यान दें।

6. पीएनडीटी कानून के अंतर्गत केंद्रीय निगरानी बोर्ड का गठन किया गया और इसकी नियमित बैठकें कराई जा रही हैं।

7. वेबसाइटों पर लिंग चयन के विज्ञापन रोकने के लिए यह मामला संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के समक्ष उठाया गया।

8. राष्ट्रीय निरीक्षण और निगरानी समिति का पुनर्गठन किया गया और अल्ट्रा साउंड निदान सुविधाएं के निरीक्षण में तेजी लाई गई। बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, पंजाब, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश में निगरानी का कार्य किया गया।

9. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कानून के कार्यान्वयन के लिए सरकार सूचना, शिक्षा और संचार अभियान के लिए राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को वित्तीय सहायता दे रही है।

10. राज्यों को सलाह दी गई है कि इसके कारणों का पता लगाने के लिए कम लिंग अनुपात वाले जिलों/ब्लाकों/गांवों पर विशेष ध्यान दें, उपयुक्त व्यवहार परिवर्तन संपर्क अभियान तैयार करे और पीसी और पीएनडीटी कानून के प्रावधानों को प्रभावकारी तरीके से लागू करे।

11. धार्मिक नेता और महिलाएं लिंग अनुपात और लड़कियों के साथ भेदभाव के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में शामिल हों।

12. भारत सरकार और अनेक राज्य सरकारों ने समाज में लड़कियों और महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए विशेष योजनाएं लागू की गई हैं। इसमें धनलक्ष्मी जैसी योजना शामिल है।


राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो से प्राप्त जानकारी के अनुसार 2011 के दौरान देश में कन्या भ्रूण हत्या के कुल 132 मामले दर्ज किए गए। इस सिलसिले में 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया, 58 के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया गया और 11 को दोषी ठहराया गया।

स्थिति अभी भी नियंत्रण में नहीं है। हम रोज समाचार पत्रों में पढ़ते है, महीने में एक दो घटनाये उजागर हो जाती है। चोरी से पता नहीं कितना क्या हो रहा है।

कुछ अन्य राज्यों ने इस प्रवृत्ति को गंभीरता से लिया और इसे रोकने के लिए कई कदम उठाए, जैसे 'दिक्षक बचाओ अभियान' गुजरात में चल रहा है इसी तरह, अन्य राज्यों में भी योजनाएं चल रही हैं। भारत में, सात वर्ष से कम उम्र के बच्चों का लिंग अनुपात पिछले चार दशकों से लगातार घट रहा है। 1 9 81 में 1 हजार बच्चों पर 9 62 लड़कियां थीं। 2001 में अनुपात घट गया 927 यह एक संकेत है कि हमारी आर्थिक समृद्धि और शिक्षा के बढ़ते स्तर पर इस समस्या पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। वर्तमान समय में इस समस्या पर काबू पाने के लिए, पूर्व जागरूक तकनीकी जांच अधिनियम के सख्त कार्यान्वयन के साथ, सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए सख्ती से लागू होने की आवश्यकता है। जीवन बचाने वाले आधुनिक प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग को रोकने के लिए हर प्रयास किया जाना चाहिए। देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने अपने कार्यकाल के दौरान महात्मा गांधी की 138 वीं जयंती के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की बालिका बचाओ योजना (स्हर्त्यातुजेत्द्स्ज्य्कि) का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति को अफसोस था कि लड़कियों को लड़कियों के समान महत्व नहीं मिला। लड़की-बचपन में भेदभाव हमारे जीवन मूल्यों में खामियों को दर्शाता है। न केवल राज्यों में उन्नत, बल्कि प्रगतिशील समुदायों में भी, लिंग अनुपात की स्थिति चिंता का विषय है। हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्य में, राज्य सरकार ने सेक्स रीशस में सुधार करने और स्त्री भेषभाव को रोकने के लिए एक अनूठी योजना तैयार की है। इसके तहत यह घोषणा की गई है कि कोख में मारे गए बच्चों और उन बच्चों को मारने वाले लोगों के बारे में जानकारी देने वाले व्यक्ति को 10 हजार रुपए का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। प्रत्येक राज्य के स्वास्थ्य विभाग को ऐसे सकारात्मक कदम उठाने की जरूरत है प्रारंभिक गर्भावस्था निवारण तकनीक अधिनियम 1994 को कड़ाई से लागू करने की आवश्यकता है।

Wednesday, August 23, 2017

Menstruation in women and leave work.महिलाओ में माहवारी और काम से छुट्टी।

MC

आजकल महिलाओं में माहवारी (मासिक धर्म) के मुद्दे को लेकर बहस छिड़ी हुयी है। बहस इस बात को लेकर है, की इस अवधि के दौरान उन्हें काम से छुट्टी देनी चाहिए या नहीं। मासिक धर्म एक चक्र है। इस चक्र से हर महिला हर महीने गुजरती है। आईये इसके बारे में कुछ जानकारी प्राप्त करते है।
मासिक धर्म क्या है?
हर महिला में जब उसका गर्भ अपने अंदर रक्त की एक नयी झिल्ली (परत) बनाता है तो पुरानी झिल्ली या परत छोटे छोटे टुकड़ो में टूटकर स्रावित होकर योनि मार्ग के द्वारा अपशिष्ट के रूप में बाहर निकलती है। ये प्रक्रिया हर महीने होती है। इसे मासिक धर्म, माहवारी या इंग्लिश में Menstruation cycle कहते है। ये महिला में गर्भ को अंडे व भ्रूण परिपक्व होने के लिए हर महीने तैयार करता है। इसके चार चरण होते है।
1 . गर्भ में अंडे का निषेचित होना।
2 . निषेचित अंडे का अंडाशय में यात्रा करना।
3 . जब किसी महिला का पुरुष के साथ संसर्ग होता है, तथा पुरुष के द्वारा संसर्ग के दौरान शुक्राणु वीर्य के रूप में महिला की योनि में छोड़ दिये जाते है, तो वे परिवहन कर रहे अंडो के संपर्क में आते है। फलस्वरूप महिला गर्भ धारण कर लेती है। अगले महीने की माहवारी रूक जाती है। अब महिला के गर्भाशय में अंडे को पलवित करने के लिए जो झिल्ली पहले टूटती थी वो अपनी भूमिका निभाने लगाती है। अगर किन्ही कारणों से शुक्राणु व अंडे का मिलन नहीं होता है, तब वही झिल्ली पुनः वही प्रक्रिया दोहराती है।फलस्वरूप महिला अगले महीने फिर माहवारी चक्र से गुजरेगी।
4 . इस दौरान 20 से 60 मिली अपशिष्ट रक्त महिला के शरीर से बहार आता है। साधारण रूप से किसी में इसकी मात्रा कम व किसी में इसकी मात्रा ज्यादा हो सकती है। मोटे तौर पर 4 -12 T चम्मच।

FRC

 इस दौरान महिला के शरीर में कुछ हार्मोन स्रावित होते हैं। जो अपशिष्ट के रूप में योनि मार्ग के द्वारा अशुद्ध रक्त के साथ मिलकर शरीर से बहार निकलते है।

हर महिला इस चक्र के शुरू होने से पहले अपने आप को मानसिक रूप से तैयार करती है। मानसिक व शारीरिक कष्ट हर महिला में अलग अलग होता है। ये शारीरिक संरचना व लैंगिक गुणों पर निर्भर करता है। कोई महिला साधारण तरीके से व कोई महिला भयंकर शारीरक व मानसिक कष्ट से गुजर कर इस चक्र को पूरा करती है। साधारण व सहज रूप से पूर्ण करने वाली महिलाये आम तौर पर शारीरिक रूप से स्वस्थ होती है। लेकिन कुछ महिलाये स्वस्थ होने के बावजूद भी अत्यधिक वेदना से गुजरती है। उनमें इस अवधि के दौरान मानसिक रूप से शारीरिक रूप से आमूल चूल परिवर्तन देखे गए है। चिड़चिड़ापन, भूख न लगना, किसी काम में मन नहीं लगना, चक्कर आना, उल्टी आना, भयंकर पेट दर्द, सर दर्द, जी मिचलाना, बार बार मोशन की शिकायत आदि शारीरिक लक्षण देखने को मिलते है। ये स्थिति 2 से 10 दिन अलग अलग महिलाओं में अलग अलग रूप से देखि गयी है। कोई महिला इस स्थिति से दो दिन में बाहर निकल आती है, तो किसी किसी महिला को दस दिन का लम्बा पीड़ादायक समय गुजारना पड़ता है।

मासिक धर्म में होने वाली पीड़ा को कम करने के तरीके 

इस दौरान होने वाली शारीरिक व मानसिक पीड़ा को निम्न उपाय अपनाकर बहुत हद तक काम किया जा सकता है।
1 . हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन :-
महिलाओं को मासिक धर्म शुरू होने के 4 -5 दिन पहले से ही दोनों समय के खाने में हरी पत्तेदार सब्जियों का भरपूर उपयोग करना चाहिए। इनमे लौह तत्व व vitamin B प्रचुर मात्रा में होने के कारण खाने को पचने में मदद करती है। अगर खाना अच्छे से पचेगा तो बाकि शारीरिक क्रियाओं में आसानी हो जाती है
2 . सूखे मेवे या नट्स (NUTS) :-
बादाम, काजू, अखरोट, दाख आदि वसा से भरपूर होते है। इनमे Omega-3 नामक पदार्थ बहुतायत से पाया जाता है जो शरीर की अंदरूनी क्रियाओं को सहज रूप में संपन्न करने में मददगार है।
3 . साबुत अनाज या फाइबर :-
भीगे चन्ने, अंकुरित अनाज, सुबह अल्पाहार में जरूर शामिल करे। चोकर युक्त आटे से बानी रोटियां आपको रुक रुक कर आने वाली माहवारी से छुटकारा दिलाएगा।
4. ताजे फल :-
अपनी पाचन तंत्र को शक्ति देने और अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने का एक और शानदार तरीका एंटीऑक्सिडेंट्स के साथ है। इसलिए माहवारी से पहले ही ताजे रसदार फलों का खूब सेवन करें। ये आपको माहवारी के समय होने वाले दर्द से राहत दिलाएगा।
5. पानी का सेवन :-
ये एक उपाय सबसे श्रेष्ठ है। पानी का ज्यादा सेवन अपशिष्ट एकत्रित होने में मदद करता है। जो अशुद्ध रक्त के रूप में थक्को (Clots) की शक्ल में योनि मार्ग से बहार निकलेगा। ये दर्द में बहुत आराम पहुंचाएगा। जितना ज्यादा व जितनी जल्दी अशुद्ध रक्त शरीर से बाहर आएगा उतना जल्दी ये चक्र पूरा हो जायेगा।

सावधानियां।
आप मासिक धर्म चक्र के शुरू होने के बाद अपने दैनिक स्वच्छता का विशेष ध्यान रखे।
गर्म स्नान करके, आप ऐंठन कम करने और अपने आप को फिर से जीवंत करने में मदद कर सकती हैं, ताकि आप फिर से ताजा महसूस कर सकें। आपके पेट के शीर्ष पर एक गर्म पानी का थैला भी मदद कर सकता है कुछ दवाइयां हैं जो अच्छी तरह से मदद कर सकती हैं, लेकिन इससे पहले एक स्त्री रोग विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है।

अब मुद्दा ये है, कि इस अवधि के दौरान इन महिलाओं को कार्य स्थल से अवकाश देना चहिये या नहीं। इस पर सटीक टिप्पणी करना तो मुश्किल है। क्योंकि हर महीने कार्य स्थल से किसी महिलाकर्मी को कम से कम 2 दिन की छुट्टी तो देनी ही पड़ेगी। यहाँ तक तो ठीक है। लेकिन उन महिलाओ का क्या जिनमें यह चक्र 5 दिन, 7 दिन लम्बा हो जाता है। इसको नियोक्ता व महिलाओं के संगठन आपस में मिल जुलकर हल कर सकते है। नियोक्ता चाहे तो जिन संस्थानों (प्राइवेट) में अतिरिक्त समय व दिवस पर कार्य होता है, उनमें तो हल निकल सकता है।  लेकिन सरकारी कार्यालयों में जहाँ 5 कार्य दिवस है तथा अतिरिक्त समय का कोई प्रावधान नहीं है वहां पर फिर विरोधाभाष होगा।अगर ये अवकाश सवैतनिक हैं तो नियोक्ता पर अतिरिक्त व्यय भार होगा जिसे कोई भी नियोक्ता अपने संसथान के लिए स्वीकार्य नहीं समझेगा।अगर अवैतनिक हैं तो महिला कर्मी अपने आर्थिक हित प्रभावित मानने लगती है। समान काम समान वेतन का उद्देश्य गौण हो जायेगा। महिलाओं को इसे अधिकार स्वरूप नहीं मांगकर समस्या के हल के रूप में सोचना पड़ेगा। हर संस्थान की रीढ़ वहां काम करने वाले कर्मचारी होते है। जिन संसथानो में महिला कर्मी पुरुष कर्मियों के बराबर है, वहां पर समस्या बड़ी विकट हो सकती है। महिला कर्मी की अनुपस्थिति में पुरुष कर्मी पर अतिरिक्त कार्य भार आएगा जिसे वह हर महीने कतई बर्दास्त नहीं करेगा।

*फोटो गूगल से लिए गए है।               

Sunday, August 20, 2017

बछबारस की कहानी । Bachh Baras Katha aur Pooja Vidhi in Hindi.

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बछ बारस द्वादशी की कहानी व व्रत का उजमन भारतीय महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। किसी महिला के लड़का होता है या जिस वर्ष लड़के का विवाह होता है, उस साल बछबारस का उजमन करते हैं। वैसे तो सब पूजा हर साल करते हैं, वैसे ही कर ले। बछबारस के उजमन में एक थाली में भीगे हुए सवा सेर मोठ , बाजरा कि तेरह छोटी छोटी कुड़ी कर दें। दो दो मुठि बाजरा का आटा में घी चीनी पानी से पिंड बना ले। साथ में दो दो टुकड़े खीरा ककड़ी के रखें। उनके ऊपर एक एक तिल व एक एक रूपया रखें। और रुपया रखकर सासु जी ने पगा लग कर दे। वह बाद में गीत गाते हुए जोहड पूजन जाना चाहिए। पूजा की सब सामग्री साथ लेकर जाएँ पूजा करके वापस गीत गाते हुए आना चाहिए।

बछबारस की कहानी

एक साहूकार था जिसके सात बेटे थे और खूब सारे पोते थे। साहूकार ने एक जोहड बनवाया। 12 बरस हो गए लेकिन उसमें पानी नहीं आया। जब उसने पंडितों को बुलाकर उसका कारण पूछा, तो पंडितों ने बोला कि या तो बड़े बेटा की या बड़े पौत्र की बलि देनी पड़ेगी। तब साहूकार ने खूब सोच विचार करके अपनी बड़ी बहू को पीहर भेज दिया। एक दिन पंडितों के कहे अनुसार बड़े पोते की बलि दे दी। थोड़ी देर में गर्जती बरसती बदलिया आई और जोहड़े में पानी भर गया। उसके बाद बछ बारस की तिथि आई तब सब बोले अपना जोहड़ा भर गया तो जोहड़ा पूजने चलो। जब सारे लोग जोहड़ा पूजने गए। तब साहूकार भी जाने लगा। जाते वक्त अपनी दासी से बोला कि गेहूंला को तो बांध देना व धनुला को खोल देना। (गेहूंला व धनुला गाय के बछड़ों के नाम थे ) उसने उल्टा कर दिया जिससे गेहूंला जो थोड़ा बड़ा था वो भाग गया। और पानी में डूब गया। उधर बड़े पोते के बलि पहले ही दे दी गयी थे। बछ बारस पूजने के लिए बड़े बेटे की बहु भी पीहर से आ गयी थी। सबने गाजे बाजे से जोहड़ा पूजा। जोहड़ा पूजने के बाद जब छोटे बच्चे खेल कर जोहड़े में से निकले तो उनका बड़ा पोता भी मिट्टी कीचड़ में सना हुवा जोहड़े से बहार निकला। जब सास बहू एक दूसरे की तरफ देखने लगी। सासु ने बहू को बलि देने की सारी बात बता दी और कहा कि बछबारस माता ने अपना सत दिखाया है, जिससे बलि दिया हुवा पौत्र वापस दे दिया। जोहड़ा पूजने के बाद घर आए तो गेहूंला नहीं दिखाई दिया तो दासी से पुछा कि बछड़ा कहां गया तो दासी बोली कि बछड़ा को तो मैंने खोल दिया व सारी बात बताई। साहूकार गुस्सा होकर बोले कि एक पाप तो मैं उतार कर आया हूँ, तुमने दूसरा लगा दिया।  साहूकार मरे हुए बछड़े को मिट्टी में गाड़ दिया। अब साहूकार गम में डूब गया और सर पकड़ के बैठ गया। संझ्या को गाय चर कर आई और आपने बच्चे को नहीं देखकर जमीन खोदने लगी तो बछड़ा माटी में गोबर में लिपटा है, और जीवित है। सरे गांव में यह चर्चा का विषय बन गया। तब गांव वाले आये और बोले की ये तो चमत्कार हो गया। साहूकार ने गांव में हरकारा फिरा दिया कि सब बेटा की मां बछबारस का व्रत करना व जोहड़ पूजना। तब से बछ बारस का पूजन का विधान हुवा। हे बछबारस माता जैसा साहूकार ने दिया ऐसा हमें भी देना। कहते को सुनते को हुंकारा भरते को सबको दीजिए इसके बाद बिंदायक जी की कहानी कहते हैं।

बिंदायक जी की कहानी  

विष्णु भगवान लक्ष्मी जी को ब्याहने के लिए जाने लगे तब सारा देवी देवताओं को बारात में ले जाने के लिए बुलाया। जब सब जाने लगे तो बोले कि गणेश जी को नहीं ले जाएंगे क्योंकि सवा मण मुंग, सवा मण चावल घी का तो कलेवा करते हैं। जीमने फिर बुलाओ। उनका पेट बड़ा है। दुन्द दुन्दला, सूंड सूंडाला, उखला सा पांव छाजला सा कान, मस्तक मोटा, लाजे भीम कुमारी लाजे कुंडापुर की नारी। इनको साथ लेकर के क्या करेंगे। इन्हें तो घर की रखवाली के लिए छोड़कर जाएंगे। जब सब बारात में चले गए तो उधर नारद जी गणेश जी से कहने लगे कि आपका तो बहुत अपमान कर दिया। बारात बुरी लगती है इसलिए आपको यहां छोड़ कर चले गए। तब गणेश जी ने चूहों को आज्ञा दी की सारी धरती को खोदकर खोखला बना दो। खोखली होने के कारण उधर भगवान विष्णु जी का रथ धरती में समा गया। सब कोई निकालने के लिए लग गए पर पहिया निकल नहीं रहा था। तब किशन नाम के खाती को बुलाया गया। उसने अकर पहिया के हाथ लगा कर बोला "बोलो जय गणेश जी महाराज की" और पहिया निकल गया। सब कोई पूछने लगे कि गणेश जी को क्यों याद किया। तब खाती बोला गणेश जी को स्मरण किए बगैर कोई भी काम सिद्ध नहीं होता। सब कोई सोचने लगे हम तो उसे नाहक ही छोड़कर आए हैं। उसके बाद सब कोई गणेश जी को काम के शुरुआत में स्मरण करने लगे। फिर उन्हें बारात में लेकर गए। इस प्रकार से गणेश जी को रिद्धि-सिद्धि परणाई। उसके बाद विष्णु भगवान ने लक्ष्मी जी को अपनाया। तो हे! गणेश जी महाराज जैसा भगवान के काज संवारे ऐसा सबका का काज संवारना। कहते का सुनते का हुंकारा भरते का हमारा भी।

इस प्रकार बछ बारस की कथा सुनते है। व पूजा करते है। 

Friday, August 18, 2017

जयपुर भर्मण के लिए 5 महत्वपूर्ण जगह। Top 5 places visit to Jaipur.

जयपुर में भर्मण के लिए 5 महत्वपूर्ण जगह।
1. सिटी पैलेस 
सिटी पैलेस एक महल परिसर है, जो गुलाबी शहर जयपुर के केंद्र में स्थित है। खूबसूरत परिसर जिसमें कई भवन, विशाल आंगनों और आकर्षक उद्यान शामिल हैं, राजसी इतिहास का स्मारक है। चंद्र महल और मुबारक महल परिसर में कुछ महत्वपूर्ण संरचनाएं हैं। बीते युग की बहुमूल्य वस्तुओं को संरक्षित करने के लिए, महल के कई हिस्सों को संग्रहालयों और कला दीर्घाओं में परिवर्तित कर दिया गया है। महल की सुंदरता का गवाह बनने के लिए, दुनियाभर से हजारों मेहमान पर्यटक हर साल सिटी पैलेस पर जाते हैं।
सिटी पैलेस जयपुर के महाराजा का सिंहासन दरबार था, जो कच्छवाहा राजपूत वंश के नेतृत्व में था। महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय, जिन्होंने 1699 से 1744 तक आमेर पर शासन किया, ने शहर के परिसर के निर्माण की शुरुआत की जो कि कई एकड़ में फैल गई। उन्होंने पहले महल परिसर की बाहरी दीवार खड़ा करने का आदेश दिया निर्माण जो कि 1729 में शुरू हुआ था, पूरा होने में तीन साल लग गए। महल का परिसर पूरी तरह से 1732 में बनाया गया था।
पता कंवर नगर, जयपुर, राजस्थान - 302002
प्रवेश शुल्क: 75 रुपये विदेशियों के लिए प्रवेश शुल्क: 300 रु। बच्चों के लिए प्रवेश शुल्क: 40 रुपए
समय - 9.30 बजे से - 5.00 अपराह्न, फोन नंबर + 91-141-4088888
वेबसाइट www.msmsmuseum.com
सिटी प्लेस 
2. आमेर का किला 
आमेर का किला 4 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुवा है। जयपुर शहर से 11 किलोमीटर दूर आमेर की पहाड़ियों में स्थित है। यह जयपुर क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। आमेर किला राजा मान सिंह द्वारा बनाया गया था। आमेर किला अपनी कलात्मक शैली के लिए जाना जाता है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों शैलियों का समावेश है। अपने बड़े फाटकों के साथ, और घुमावदार रास्ते, किला पहाड़ी पर, मावठा झील की तरफ देखता हुवा प्रतीत होता है।

आमेर किला 16 वीं सदी में राजा मान सिंह (21 दिसंबर, 1550 - 6 जुलाई, 1614) द्वारा बनाया गया था। मान सिंह, जो पहले युद्ध प्रमुखों में से एक था, और सम्राट अकबर के विश्वस्त जनरल थे। अकबर ने उसे 'नवरत्न' या शाही दरबार के 9 रत्नों में शामिल किया था। मान सिंह ने 1592 में सफेद और लाल बलुआ पत्थर से इस किले का निर्माण शुरू किया था। वे आमेर के कच्छवाहा (राजपूत) थे। आमेर जयपुर की राजधानी के नाम से जाना जाता था। इसके पास ही शिला माता का एक भव्य मंदिर स्थित है। जहाँ पर शीतल अष्टमी को विशाल मेला लगता है। राजा मान सिंह द्वारा इस मंदिर की मूर्ती को स्थापित करवाया गया था। ये कच्छावा वंश की कुल देवी के रूप में जानी जाती है। 
आमेर, जयपुर, राजस्थान - 302002
प्रवेश शुल्क: 25 रुपये विदेशियों के लिए प्रवेश शुल्क: 200 रु। स्टूडेंट्स 10 रु , विदेशी स्टूडेंट्स 100 रु
समय - 8.00 बजे से - 6.00 शाम।  फोन नंबर 0141 253 0293
दो व्यक्तियों के लिए आमेर पैलेस में हाथी सवारी 900 / -
वेबसाइट https://www.amberfort.org
आमेर किला 
3. जंतर मंतर जयपुर
'गुलाबी शहर' के संस्थापक महाराजा जय सिंह II एक महान विद्वान और ज्योतिषी के ज्ञाता थे। उन्होंने विभिन्न विद्यालयों में दर्शन, ज्योतिष, वास्तुकला और धर्म का अध्ययन किया। यूक्लिड (महान मैथेमेटिशन) के सूत्र, टॉलेमी के सिंटेक्सिस और आर्यभट्ट के गणितीय सूत्रों जैसे सार्वभौमिक गणितीय अवधारणाओं के साथ अच्छी तरह से वाकिफ थे। वर्ष 1718 में, अपनी इच्छा के अनुसार एक वेधशाला का निर्माण करना चाहता थे। इसके लिए, उन्होंने खगोल विज्ञान के विषय का अध्ययन किया और फिर उत्तर भारत के चार स्थानों पर पांच विभिन्न वेधशालाओं का निर्माण किया। इन जगहों पर, वे विद्वान खगोलविदों के साथ खगोलीय घटनाओं के लिए अध्ययन करते थे। जयपुर में 'जंतर मंतर' देश का सबसे बड़ा कंजर्वेटरी सेंटर है, जिसे बार-बार पुनर्निर्मित किया गया था। कई उपकरणों का निर्माण किया गया था, जो समय के सटीक माप, अजीमुथ कोण, सूरज की स्थिति और नक्षत्रों की स्थिति प्रदान करते हैं, साथ में कई अन्य खगोलीय घटनाएं। जयपुर वेधशाला केवल सात साल के लिए कार्य करती रही थी। क्योंकि महाराज सटीक, खगोलीय टिप्पणियों को लेकर सफल नहीं हुए थे।
पता: गंगोरी बाजार, जे.डी.ए. बाजार, कंवर नगर, जयपुर, राजस्थान 302002
प्रवेश शुल्क: 50 रुपये विदेशियों के लिए प्रवेश शुल्क: 200 रु।
समय - 9.00 बजे से - 5.00 शाम।  फोन नंबर 0141 
जंतर मंतर 
4. जयगढ़ किला
जयगढ़ किला सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा निर्मित एक विशाल गढ़ है। यह लगभग अभेद किला विशाल युद्धपोतों से घिरा हुआ है। जयगढ़ का किला आमेर किले जिसे 'अंबर' किला भी कहा जाता है, के साथ एक सुरंग द्वारा जुड़ा हुआ है। मूल रूप से आमेर किले व महल की रक्षा करने के लिए बनाया गया था। जयगढ़ किले की वास्तुकला भी आमेर के किले के समान ही है। यहाँ से जयपुर शहर का एक विहंगम दृश्य दिखाई देता है। किले का मुख्य आकर्षण पहियों पर खड़ी दुनिया की सबसे बड़ी तोप है। एक भव्य महल परिसर सभा भवन और एक शस्त्रागार के साथ 'शुभत निवास' के रूप में जाना जाता है। योद्धाओं के सभा हॉल, किले की जटिल वास्तुकला के अलावा, किला एक विशाल खजाने के लिए प्रसिद्ध था जिसे किले के नीचे दफन माना जाता था। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने 1970-1980  के दशक में खजाना जब्त कर लिया था। जयगढ़ किले को जयपुर शहर और आमेर किले को सरदारों और प्रतिद्वंद्वियों से सुरक्षित बनाने के लिए बनाया गया था।

जयगढ़ किला, जयपुर, राजस्थान 302001 
समय - 9.00 बजे से - 5.00 शाम।  फोन नंबर 081044 46566
जय गढ़ 
5. राज मंदिर सिनेमा 
एमआई रोड पांच बत्ती के पास, राज मंदिर जयपुर में एक हिंदी फिल्म देखने के लिए भव्य सिनेमा घर है। यह भव्य सिनेमा घर एक विशाल गुलाबी क्रीम-केक की तरह दिखता है, जिसमें एक मकर ऑडिटोरियम और एक फ़ोयर (प्रवेश द्वार) है। जैसा कहीं मंदिर और डिजनीलैंड के बीच होता है। बुकिंग 9 से 10 दिनों के लिए सात घंटे पहले बुकिंग कर सकते हैं


अग्रिम बुकिंग सीट हासिल करने का सबसे अच्छा मौका है, लेकिन इसे नयी फिल्म की रिलीज के शुरुआती दिनों में भूल जाते हैं। वैकल्पिक रूप से, अपना टिकिट लेने के लिए अपने आप को मजबूती से कतार में बनाये रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। वर्तमान बुकिंग कार्यालय पर्दा उठाने के 45 मिनट पहले खुलता है। सबसे सस्ते टिकटों से बचें, वो आप को स्क्रीन के बिलकुल करीब ले जाकर बैठा देगा। 
टिकट दर - 120-400
आरक्षण सुबह 10 बजे से, दोपहर 12.30 बजे, 3 बजे, 6.30 बजे और 10 बजे
Http://www.therajmandir.com

0141-237 9 7272
राज मंदिर सिनेमा 
आप सभी का राजमंदिर में फिल्म देखने के लिए स्वागत है। 
धन्यवाद !








Monday, August 14, 2017

जींदगी एक पहेली है ।

दो खबरों पर जरा नजर डालिए।
1- 12 हजार करोड़ रुपये की मालियत वाले रेमंड ग्रुप के मालिक विजयपत सिंघानिया पैदल हो गए। बेटे ने पैसे-पैसे के लिए मोहताज कर दिया।
2- करोड़ों रुपये के फ्लैट्स की मालकिन आशा साहनी का मुंबई के उनके फ्लैट में कंकाल मिला।
विजयपत सिंघानिया और आशा साहनी, दोनों ही अपने बेटों को अपनी दुनिया समझते थे। पढ़ा-लिखाकर योग्य बनाकर उन्हें अपने से ज्यादा कामयाबी की बुलंदी पर देखना चाहते थे। हर मां, हर पिता की यही इच्छा होती है।
विजयपत सिंघानिया ने यही सपना देखा होगा कि उनका बेटा उनकी विरासत संभाले, उनके कारोबार को और भी ऊंचाइयों पर ले जाए। आशा साहनी और विजयपत सिंघानिया दोनों की इच्छा पूरी हो गई।
आशा का बेटा विदेश में आलीशान जिंदगी जीने लगा, सिंघानिया के बेटे गौतम ने उनका कारोबार संभाल लिया,
तो फिर कहां चूक गए थे दोनों।
क्यों आशा साहनी कंकाल बन गईं,
क्यों विजयपत सिंघानिया 78 साल की उम्र में सड़क पर आ गए। मुकेश अंबानी के राजमहल से ऊंचा जेके हाउस बनवाया था, लेकिन अब किराए के फ्लैट में रहने पर मजबूर हैं। तो क्या दोषी सिर्फ उनके बच्चे हैं..?
अब जरा जिंदगी के क्रम पर नजर डालें। बचपन में ढेर सारे नाते रिश्तेदार, ढेर सारे दोस्त, ढेर सारे खेल, खिलौने..। थोड़े बड़े हुए तो पाबंदियां शुरू।
जैसे जैसे पढ़ाई आगे बढ़ी, कामयाबी का फितूर, आंखों में ढेर सारे सपने। कामयाबी मिली, सपने पूरे हुए, आलीशान जिंदगी मिली, फिर अपना घर, अपना निजी परिवार। *हम दो, हमारा एक, किसी और की एंट्री बैन। दोस्त-नाते रिश्तेदार छूटे*।
यही तो है शहरी जिंदगी। दो पड़ोसी बरसों से साथ रहते हैं, लेकिन नाम नहीं जानते हैं एक-दूसरे का। क्यों जानें, क्या मतलब है। हम क्यों पूछें..। फिर एक तरह के डायलॉग-हम लोग तो बच्चों के लिए जी रहे हैं।
मेरी नजर में ये दुनिया का सबसे घातक डायलॉग है- *हम तो अपने बच्चों के लिए जी रहे हैं*, बस सब सही रास्ते पर लग जाएं।' अगर ये सही है तो फिर बच्चों के कामयाब होने के बाद आपके जीने की जरूरत क्यों है।
यही तो चाहते थे कि बच्चे कामयाब हो जाएं। कहीं ये हिडेन एजेंडा तो नहीं था कि बच्चे कामयाब होंगे तो उनके साथ बुढ़ापे में हम लोग मौज मारेंगे..? अगर नहीं तो फिर आशा साहनी और विजयपत सिंघानिया को शिकायत कैसी। दोनों के बच्चे कामयाब हैं, दोनों अपने बच्चों के लिए जिए, तो फिर अब उनका काम खत्म हो गया, जीने की जरूरत क्या है।
आपको मेरी बात बुरी लग सकती है, लेकिन ये जिंदगी अनमोल है, सबसे पहले अपने लिए जीना सीखिए। *जंगल में हिरन से लेकर भेड़िए तक झुंड बना लेते हैं, लेकिन इंसान क्यों अकेला रहना चाहता है*। गरीबी से ज्यादा अकेलापन तो अमीरी देती है।
 *क्यों जवानी के दोस्त बढ़ती उम्र के साथ छूटते जाते हैं। नाते रिश्तेदार सिमटते जाते हैं*।
करोड़ों के फ्लैट की मालकिन आशा साहनी के साथ उनकी ननद, भौजाई, जेठ, जेठानी के बच्चे पढ़ सकते थे..? क्यों खुद को अपने बेटे तक सीमित कर लिया। सही उम्र में क्यों नहीं सोचा कि बेटा अगर नालायक निकल गया तो कैसे जिएंगी। जब दम रहेगा, दौलत रहेगी, तब सामाजिक सरोकार टूटे रहेंगे, ऐसे में उम्र थकने पर तो अकेलापन ही हासिल होगा।
इस दुनिया का सबसे बड़ा भय है अकेलापन। व्हाट्सएप, फेसबुक के सहारे जिंदगी नहीं कटने वाली। *जीना है तो घर से निकलना होगा, रिश्ते बनाने होंगे। दोस्ती गांठनी होगी। पड़ोसियों से बातचीत करनी होगी*।
आज के फ्लैट कल्चर वाले महानगरीय जीवन में सबसे बड़ी चुनौती तो ये है कि खुदा न खासता आपकी मौत हो गई तो क्या कंधा देने वाले चार लोगों का इंतजाम आपने कर रखा है..? जिन पड़ोसियों के लिए नो एंट्री का बोर्ड लगा रखा था, जिन्हें कभी आपने घर नहीं बुलाया, वो भला आपको घाट तक पहुंचाने क्यों जाएंगे..?
याद कीजिए दो फिल्मों को। एक *अवतार*, दूसरी *बागबां*।
अवतार फिल्म में नायक अवतार (राजेश खन्ना) बेटों से बेदखल होकर अगर जिंदगी में दोबारा उठ खड़ा हुआ तो उसके पीछे दो वजहें थीं। एक तो अवतार के दोस्त थे, दूसरे एक वफादार नौकर, जिसे अवतार ने अपने बेटों की तरह पाला था। वक्त पड़ने पर यही लोग काम आए। बागबां के राज मल्होत्रा (अमिताभ बच्चन) बेटों से बेइज्जत हुए, लेकिन दूसरी पारी में बेटों से बड़ी कामयाबी कैसे हासिल की, क्योंकि उन्होंने एक अनाथ बच्चे (सलमान खान) को अपने बेटे की तरह पाला था, उन्हें मोटा भाई कहने वाला दोस्त (परेश रावल) था, नए दौर में नई पीढ़ी से जुड़े रहने की कूव्वत थी।  विजयपत सिंघानिया के मरने के बाद सब कुछ तो वैसे भी गौतम सिंघानिया का ही होने वाला था, तो फिर क्यों जीते जी सब कुछ बेटे को सौंप दिया..? क्यों संतान की मुहब्बत में ये भूल गए कि इंसान की फितरत किसी भी वक्त बदल सकती है। जो गलती विजयपत सिंघानिया ने की, आशा साहनी ने की, वो आप मत कीजिए। *रिश्तों और दोस्ती की बागबानी को सींचते रहिए*, ये जिंदगी आपकी है, बच्चों की बजाय पहले खुद के लिए जिंदा रहिए। आप जिंदा रहेंगे, बच्चे जिंदा रहेंगे। *अपेक्षा किसी से भी मत कीजिए, क्योंकि अपेक्षाएं ही दुख का कारण हैं*।